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| क्षय रोग को एक
विश्वव्यापी स्वास्थ्य आपात स्थिति के रूप में पहचाने जाने के बाद अब एक
दशक से अधिक समय हो गया है, फिर भी क्षय
रोग वयस्कों में मृत्यु लानेवाले प्रमुख संक्रमणशील रोगों में प्रथम
स्थान बनाए हुए है। लगभग एक-तिहाई विश्व आबादी में, या 2 अरब व्यक्तियों में, क्षय रोग का जीवाणु विद्यमान है, यद्यपि इनमें से अधिकांश लोगों में क्षय रोग का सक्रिय रूप कभी नहीं
प्रकट होता। यह रोग वर्ष 1980 से उत्कर्ष पर
है और इसका सर्वाधिक फैलाव दक्षिणपूर्व एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में
केंद्रित है। क्षय रोग के पुनरुत्थान का सीधा संबंध एचआईवी/एड्स का
विश्वव्यापी महामारी के रूप में उभरने से जुड़ा हुआ है -- विशेषकर
अफ्रीका में जहां क्षय रोग के बढ़ने के लिए जिम्मेदार कारणों में प्रमुख
एचआईवी है। विश्वभर में जो लगभग 4 करोड़ क्षय
रोगी हैं, उनमें से एक-तिहाई
एचआईवी/एड्स के भी रोगी हैं। दवा प्रतिरोधी टीबी होने के
कारण, विशेषकर उन जगहों में जहाँ कई टीबी के रोगी एच आय वी से भी ग्रसित
हैं, टीबी नियंत्रण को गंभीर खतरा हो गया है। इसलिए वहाँ इसकी रोकथाम और
उपचार के प्रयासों को मजबूत बनाने की जरूरत पुष्ट होती |
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विश्वव्यापी महामारी का स्वर
हर
साल 80 लाख नए लोगों को क्षय रोग का सक्रिय रूप होता है, और उनमें से 20 लाख हर साल इस रोग के
कारण मर जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुमान लगाया है कि 1.4 करोड़ लोग क्षय रोग लिए जीवन-यापन कर रहे हैं। वर्ष 2005 में, विश्व भर में प्रकट हुए 88 लाख नए क्षय रोगियों में से 39 लाख का निदान प्रयोगशाला परीक्षण से हुआ और उनमें से 6.29 लाख एचआईवी-पोजिटिव भी
पाए गए। वर्ष 2005 में अनुमानतः 16 लाख लोगों की मृत्यु क्षय रोग के कारण हुई और इनमें से 12 प्रतिशत एचआईवी के भी रोगी थे। जिन लोगों में क्षय रोग सक्रिय रूप से
विद्यमान है, यदि उनका समुचित इलाज
नहीं हुआ, तो वे हर साल 10 से 15 नए लोगों को यह खतरनाक
रोग दे सकते हैं।
क्षय रोग के अधिकांश मामले दक्षिणपूर्व एशिया और अफ्रीका में होते
हैं। क्षय रोग के एक-तिहाई नए
मामले दक्षिणपूर्व एशिया में सामने आते हैं, लेकिन उप-सहारा अफ्रीका में क्षय रोग का प्रति व्यक्ति आपात (इन्सिडेन्स)
विश्व भर में सबसे अधिक है। क्षय रोग के कारण होने वाली अनुमानित मौतें और
प्रति व्यक्ति मृत्यु दर अफ्रीका में सबसे अधिक है, जहां एचआईवी के कारण क्षय रोग का आपात बहुत बढ़ गया है।
क्षय रोग और एचआईवी/एड्स की जोड़ी अत्यंत खतरनाक है और ये एक-दूसरे की
प्रगति को बढ़ाते हैं। चूंकि एचआईवी रोग-प्रतिरोधक
क्षमता को कमजोर कर देती है, जिन लोगों को
एचआईवी और क्षय रोग दोनों हो, ऐसे लोगों के
क्षय रोग के कारण बीमार होने की संभावना एचआईवी-नेगेटिव व्यक्तियों की
तुलना में अधिक रहती है। एचआईवी+ व्यक्तियों में मृत्यु का प्रमुख कारण
क्षय रोग ही होता है। अफ्रीका में पिछले 10 वर्षों में क्षय रोग के निरंतर बढ़ते आपात के लिए जिम्मेदार एकमात्र
प्रमुख कारण एचआईवी है।
क्षय रोगियों के इलाज के लिए, क्षय रोग का संक्रमण
रोकने के लिए और क्षय रोग के जीवाणुओं में दवा-प्रतिरोधी क्षमता के विकास
को रोकने के लिए डोट्स एक कारगर एवं सस्ती उपचार विधि है। वर्ष 1995 से 2 करोड़ से अधिक क्षय
रोगियों का टीबी नियंत्रण के लिए अंतर्राष्ट्रीय रूप से अनुशंसित डोट्स
रणनीति (सीधी देखरेख में सीमित अवधि के लिए उपचार) के तहत इलाज हुआ है।
वर्ष 2005 के अंत तक विश्वभर में 187 देश डोट्स रणनीति को
लागू कर रहे हैं, और जिन क्षेत्रों में
डोट्स रणनीति लागू की जा रही है, वहां विश्व
आबादी के 89 प्रतिशत का निवास है। वर्ष 2005 में डोट्स कार्यक्रम ने प्रयोगशाला परीक्षण से 23 लाख क्षय रोग के मामलों का पता लगाया, जो 60 प्रतिशत केस डिटेक्शन दर के बराबर है, और डोट्स उपचार की सफलता दर 84 प्रतिशत रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2005 में दावा किया कि क्षय रोग के लिए 70 प्रतिशत केस डिटेक्शन दर
प्राप्त किया गया और जिन लोगों में यह रोग पाया गया था उनमें से 85 प्रतिशत इलाज से ठीक हुए। संयुक्त राष्ट्र संघ के सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों में एक लक्ष्य यह भी है कि वर्ष 2015 तक 1990 में व्याप्त क्षय रोग के फैलाव को आधा किया जाए।
स्रोत
- विश्व स्वास्थ्य संगठन, वैश्विक टीबी नियंत्रण :
निरीक्षण, योजना, वित्त, मार्च 2007
नयी लिंक : http://www.who.int/tb/publications/global_report/en/index.html
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विश्व स्वास्थ्य
संगठन, टीबी
तथ्यपत्रक मार्च 2007
नयी लिंक: http://www.who.int/mediacentre/factsheets/fs104/en/index.html
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विश्व स्वास्थ्य
संगठन, टीबी और एच आय वी के बारे में
अकसर पूछे जाने वाले सवाल
नयी लिंक: http://www.who.int/tb/hiv/faq/en/index.html