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एचआईवी/एड्स की विश्वव्यापी महामारी के शुरू होने के 25 सालों में विश्व भर में लगभग 6.5 करोड़ व्यक्तियों तक इसका संक्रमण हो चुका है, जिनमें वे 2.5 करोड़ लोग भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु इस बीमारी से हो चुकी है। यदि एचआईवी/एड्स महामारी को रोकने के लिए अधिक प्रयास नहीं किए गए तो वह मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी साबित होने की राह पर है। इस दशक के अंत तक करोड़ों और लोग इसकी चपेट में आ जाएंगे। एचआईवी/एड्स महामारी विश्व भर के देशों के सामने एक राजनीतिक, आर्थिक, सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी, सामाजिक और वैज्ञानिक चुनौती बन कर खड़ी है।

महामारी की स्थिति
अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2006 के अंत तक विश्व भर में 3.95 करोड़ लोग एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे हैं। वर्ष 2006 में 43 लाख लोगों में एचआईवी फैल गया और लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु एड्स से जुड़े कारणों से हुई। एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्तियों में एक बड़ा भाग महिलाएं हैं और उनका अनुपात कुल रोगियों के लगभग आधे (48 प्रतिशत) के बराबर है। विश्व भर में नए एचआईवी-पोजिटिव व्यक्तियों में 25 वर्ष से कम उम्र के युवा जनों की तादाद रोगियों की कुल संख्या के लगभग आधे के बराबर है।

यूएनएड्स के अनुसार विश्व भर में कोई एक एड्स महामारी नहीं है। बल्कि कई क्षेत्रों और देशों में विविध महामारियां सक्रिय हैं, जिनमें से कुछ अपनी प्रारंभिक अवस्था में हैं। एचआईवी/एड्स की व्यापता के आधार पर उप-सहारा अफ्रीका सर्वाधिक प्रभावित है। उसके बाद कैरीबियन का नंबर आता है। इस महामारी की अगली लहर पूर्वी यूरोप और एशिया में उठने को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं।

आवश्यक सेवाओं तक पहुंच विश्व भर में अत्यंत कम और समग्र रूप से अनियमित है। यद्यपि ऐंटीरेट्रोवाइरल (एआरवी) उपचार तक पहुंच दिसंबर 2003 की तुलना में अब चार गुना बढ़ी है, फिर भी निम्न एवं मध्यम वित्त देशों में जून 2006 में एआरवी की जरूरत वाले लोगों में से मात्र 24 प्रतिशत को ही यह उपचार उपलब्ध हो रहा है। इसका मतलब यह है कि इन देशों में जिन 68 लाख लोगों को एआरवी की जरूरत है, उनमें से मात्र 16.5 लाख रोगियों को ही इस उपचार का लाभ मिल पा रहा है। निरोधात्मक सेवाओं तक पहुंच भी निम्न स्तर की है। निम्न एवं मध्यम वित्त देशों में हर पांच व्यक्तियों, जिन्हें एचआईवी संक्रमण होने का जोखिम है, उनमें से मात्र एक को ही निरोधात्मक सेवाओं का लाभ मिल पा रहा है।

विश्व भर में निम्न और मध्यम वित्त देशों में एचआईवी/एड्स से लड़ने के लिए वित्तीय संसाधन अधिक मात्रा में उपलब्ध हो रहे हैं, लेकिन अब भी वह पर्याप्त नहीं है। यूएनएड्स ने अनुमान लगाया है कि एचआईवी/एड्स पर हुआ कुल खर्च वर्ष 1996 के 30 करोड़ डालर से बढ़कर 2005 तक 8.3 अरब डालर तक पहुंचा और इसके 2006 में 8.9 अरब डालर और 2007 में 10 अरब डालर होने की संभावना है। लेकिन यह सब आंकड़े महामारी पर लगाम कसने के लिए आवश्यक धनराशि से कहीं कम है। अनुमानतः वर्ष 2006 में ही यह धनराशि 15 अरब डालर आंकी गई थी, और 2008 के लिए 22 अरब डालर। एचआईवी/एड्स के विरुद्ध संघर्ष का एक अहम पहलू वर्तमान प्रयासों को जारी रखना और उन्हें और व्यापक स्वरूप देना है।

स्रोत

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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FAQs

What factors make women more vulnerable to HIV infection?

A combination of biological, social, cultural and economic factors contribute to women's increased vulnerability.  In particular, gender inequalities prevent women from asserting power over their own lives and controlling the circumstances that increase their vulnerability to infection.  Women are also physiologically more susceptible to becoming infected with HIV than men.


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Region-Specific HIV Reporting Guides for India:

2006EpiReportCover2.gif

UNAIDS/WHO Epidemic Update: December 2006
The annual AIDS epidemic update reports on the latest developments in the global AIDS epidemic.

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Global HIV/AIDS Timeline
An interactive web-based timeline designed to serve as an ongoing reference tool for many of the political, scientific, cultural, and community events that have occurred from 1981 to today.


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